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Biography

सुभाष चंद्र बोस एक महान क्रांतिकारी

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subhash chandra bose

क्या आप जानते हैं सुभाष चंद्र बोस एक महान क्रांतिकारी कैसे बने आप सुभाष चंद्र बोस के महान क्रांतिकारी बनने तक की कहानी को जानना चाहते हैं तो हमारे साथ बने रहे।

सुभाष चंद्र बोस इतिहास की वह महान शख्सियत है जिसकी कहानी आप सभी को अधूरी बताई जाती है इन की पूरी कहानी खोजने का किसी ने प्रयास भी नहीं किया और जिन्होंने इन की पूरी कहानी खोजने का प्रयास किया उनको कुछ लोगों ने हर तरह से रोका।

डॉक्टर सुभाष चंद्र बोस जिन्होंने देश की आजादी के लिए अंग्रेजों से लोहा लिया, और आजाद हिंद फौज की कमान संभाली वह देश के महान क्रांतिकारियों में से एक थे।

सुभाष चंद्र बोस जैसा कौटिल्य और महान क्रांतिकारी इस देश को दोबारा नहीं मिल सकता और सुभाष चंद्र बोस के बारे में हमारी किताबों में भी इतना खास तरीके से नहीं दिया गया है।

सुभाष चंद्र बोस एक महान क्रांतिकारी

लेकिन हम आपको सुभाष चंद्र बोस एक महान क्रांतिकारी के बारे में अच्छी तरह से बताते हैं।

सुभाष चंद्र बोस

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने देश के लिए जो जो बलिदान किए वह हम कभी नहीं भूल पाएंगे लेकिन उनकी राजनीतिक विरासत पर मौत का रहस्य आज भी बना हुआ है उसे समझाने का किसी ने भी प्रयास नहीं किया और किसी को प्रयास करने भी नहीं दिया गया, उन्होंने राष्ट्रवाद और मानव जाति के उच्चतम आदर्श सत्यम शिवम सुंदरम को सर्वोच्च माना।

तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा इस तरह के नारे नेताजी सुभाष चंद्र ने दी जिन्होंने संपूर्ण सैन्य शक्ति को हिला कर रख दिया आज इस लेख में हम नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आजादी के लिए योगदान के बारे में बात करेंगे वैसे तो उन्होंने आजादी में असम के योगदान दिए लेकिन हम उनके कुछ महत्वपूर्ण योगदानो पर प्रकाश डालेंगे।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारत की एक ऐसी शख्सियत थे जिन्होंने देश के अंदर ही नहीं बल्कि देश के बाहर भी युद्ध लड़ा उन्होंने कलम चलाने से लेकर आजाद हिंद फौज का गठन करके अंग्रेजों से लोहा भी लिया और अंग्रेजों को हर प्रकार से भारत से निकालने का प्रयास किया कहीं न कहीं उनके ही प्रयासों से 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ।

सुभाष चंद्र बोस के साथ-साथ हम उनकी आजाद हिंद फौज को भी कोटि-कोटि नमन करते हैं की उन जैसे वीर यहां पैदा हुए और भारत माता के लिए अपने प्राण न्योछावर किए।

चिंतरजन दास से मुलाकात

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अपने कॉलेज के शुरुआती दिनों में ही बंगाल में क्रांति की चिंगारी उत्पन्न की जिसने भारत की आजादी की लड़ाई को एक महत्वपूर्ण दिशा दी।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आईसीएस की नौकरी छोड़ दी और लंदन से भारत लौटे लंदन से भारत लौटने पर उनकी मुलाकात चिंतरजन दास से हुई उसी समय चिंतरजन दास ने फॉरवर्ड नाम का एक अखबार शुरू किया था और उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस से मिलते ही उनको उस अखबार का संपादक बना दिया।

उस अखबार के माध्यम से नेता जी ने अपनी कलम की ताकत से ब्रिटिश सरकार के खिलाफ लिख कर अंग्रेजी हुकूमत को बुरी तरह से हिला दिया और अंग्रेजो के खिलाफ माहौल तैयार कर दिया उस कलम से शुरू की गई मुहिम के कारण नेताजी सुभाष चंद्र बोस को 1921 में 6 महीने की सजा हुई जो उनको जेल में बितानी पड़ी।

क्या आप ऐसे किसी क्रांतिकारी को जानते हैं जो कभी जेल नहीं गया?

जर्मनी से ली मदद

क्रांतिकारी राय बिहारी बोस से प्रभावित होकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजादी की लड़ाई के लिए विदेशी ताकतों से मदद जुटाने की ठान ली और उन्होंने कोलकाता में पुलिस की नजरबंदी को चकमा देकर सुभाष चंद्र बोस काबुल के रास्ते जर्मनी में दाखिल हो गए।

जर्मनी ने उनकी मुलाकात एडोल्फ हिटलर से हुई जिसने ब्रिटिश हुकूमत को कमजोर करने के लिए नेताजी को हर संभव मदद मुहैया कराने का वादा किया नेताजी को विश्वास था कि भारत की आजादी तभी संभव है जब ब्रिटेन पर विश्व युद्ध के वक्त ही निशाना साधा जाए इसी कड़ी में उन्होंने इटली और जर्मनी में कैद भारतीय युद्ध बंदियों को आजाद करवा कर एक मुक्त सेना बनाई।

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