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Delhi Oxygen Supply and Crisis

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corona delhi crisis

Delhi Oxygen Supply and Crisis की बात करें तो हमें पता चलेगा कि दिल्ली में कितने भयंकर हालात हैं वहां पर कोरोना के कारण कितने ही अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी हो रही है और कितने ही मरीज मर रहे हैं इसके साथ साथ ऑक्सीजन और कुछ दवाइयों की कालाबाजारी भी जोरों शोरों पर है।

दिल्ली उत्तर प्रदेश पंजाब हरियाणा राजस्थान इन सभी राज्यों में बहुत सारी कालाबाजारी करने वाले गिरोह पकड़े गए हैं जो असंख्य ऑक्सीजन सिलेंडर और दवाइयां छुपा कर रखे हुए थे और किसी बड़े अवसर या हालात ज्यादा खराब होने पर ऊंचे दामों में बेचने के फिराक में थे।

लेकिन इस कोरोना की घड़ी में पुलिस ने सावधानी दिखाते हुए उनको पकड़ा और उनके सारे ऑक्सीजन सिलेंडर और दवाइयां जपत कर जरूरतमंद हॉस्पिटल्स में भिजवाई।

पुलिस के सावधानी और समझदारी बड़े कार्य को देखकर बहुत सारे कालाबाजारी करने वाले लोगों के मन में भी डर का माहौल है और पुलिस ने आम जनता को यह विश्वास दिलाया है कि इस कोरोना काल में कोई भी आपकी जरूरतों का नाजायज फायदा नहीं उठा पाएगा।

Delhi Oxygen Supply

दिल्ली के कई अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलेंडर की भारी कमी के कारण कई मरीजों की मौत हो चुकी है और पिछले 3 दिनों के अंदर दिल्ली में मौत का आंकड़ा भी काफी बढ़ गया है दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी मीटिंग में यह कहा कि आप दिल्ली के लिए 800 टन ऑक्सीजन का इंतजाम करवाइए।

इसके साथ ही दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि जो ऑक्सीजन दूसरे राज्यों से दिल्ली में आती है उसे दूसरे राज्यों की बॉर्डर पर रोक लिया जाता है और उसे रोका जाए इसका कोई ठोस इंतजाम किया जाए लेकिन अगर हम इस चीज को विस्तार से जाने कि उस ऑक्सीजन को कौन रोकता है तो उसमें कुछ कार्य दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का ही है उन्होंने दिल्ली बॉर्डर पर बैठने के लिए तथाकथित किसानों का समर्थन किया।

अब वह दिल्ली बॉर्डर पर दूसरे वाहनों के साथ साथ ऑक्सीजन के ट्रक्स रोक रहे हैं और उनकी वजह से दिल्ली के अस्पतालों में मरीजों की मौत हो रही है लेकिन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल यह साफ-साफ नहीं बताएंगे कि ट्रक कौन रोक रहा है ट्रक दूसरे राज्यों की सरकार रोक रही है या उनके द्वारा आश्चर्य दिए गए तथाकथित किसान।

Corona Virus की घड़ी में अगर हालातों पर विजय पानी है तो सभी सरकारों को एक दूसरे पर इल्जाम ना लगाते हुए एक साथ होकर लड़ने की जरूरत है अगर यह सभी एक दूसरे पर इसी तरह इल्जाम लगाते रहे तो हालात और बिगड़ेंगे और यह कभी भी काबू में ना आने जैसे हो जाएंगे

दूसरी तरफ सोशल मीडिया और मेन मीडिया को भी ध्यान रखना होगा कि वह लोगों को ज्यादा डर आए नहीं उन्हें शांति बनाए रखने का प्रयास करें और उन्हें मांस लगाने और अपनी सुरक्षा खुद करने के लिए प्रेरित करें इससे ज्यादा कोरोना से और कोई बचाव नहीं हो सकता और भारत की सरकार निरंतर रूप से कोरोना को हराने के लिए प्रयासरत है।

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डॉक्टर की लापरवाही,चली गई नवजात की जान……

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डॉक्टर की लापरवाही,चली गई नवजात की जान

डॉक्टर को पृथ्वी पर भगवान का रूप माना जाता है क्योंकि एक डॉक्टर ही है जो विकारों को समझ कर उनसे मुक्ति दिलाता है परंतु कभी-कभी छोटी-छोटी लापरवाहियां बड़ी वारदात की वजह बन जाती है और पूरी डॉक्टर टीम कटघरे में खड़ी हो जाती है।
ऐसी ही कुछ खबर उत्तर प्रदेश के संभलपुरु से है जहां पर डॉक्टर की लापरवाही के चलते एक नवजात शिशु की जान चली गई।

भाग गया स्टॉफ ……… मौके पर पहुंची पुलिस….

उत्तर प्रदेश के संबलपुर जिले में बहजोई क्षेत्र से आ रही खबर के अनुसार वहां पर एक नवजात शिशु की मौत हो जाने से हंगामा हो गया।
आपको बता दें कि चितनपुर निवासी नवाब अली को उनकी पत्नी यासमीन से एक पुत्र का जन्म हुआ, जिसे कुछ समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था परंतु इलाज के दौरान उस शिशु की मृत्यु हो गई जिससे अस्पताल परिसर में हंगामा हो गया और अस्पताल का स्टाफ अस्पताल छोड़कर भाग गया।
बताया जा रहा है कि मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों को शांत कराया है इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने नर्सिंग होम को सील कर दिया है।

प्रति मिनट होती है एक नवजात की मौत……

आंकड़े के मुताबिक भारत में प्रतिवर्ष लगभग 5 मिलियन नवजात शिशु घर पर जन्म लेते हैं घर में सुविधाएं न होने से प्रायः कभी मां तो कभी बच्चे की मौत हो जाती थी परंतु स्वास्थ्य सुविधाओं में लगातार सुधार की वजह से यह आंकड़ा अब कम हुआ है फिर भी अभी प्रति मिनट एक नवजात शिशु की मृत्यु हो जा रही है।

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दोहरे हत्याकांड से दहल उठा ब्रह्मपुरी, आखिर किसने की इतनी बेरहमी से हत्या

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दोहरे हत्याकांड से दहल उठा ब्रह्मपुरी

हर एक दिन कोई ना कोई खबर रिश्तो के कत्ल से संबंधित होती है जो व्यक्ति के मानसिक कुरूपता को दर्शाता है कुछ ऐसी ही घटना मेरठ से निकल कर सामने आ रही है जहां के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के सिटी कॉलोनी देर रात दो हत्याओं से दहल उठी इसकी सूचना जब आसपास के लोगों को लगी तो हड़कंप मच गया दृश्य में कॉलोनी निवासी आभास हुआ उसकी पत्नी जुबेदा का शव खून से लथपथ जमीन पर पड़ा हुआ पाया गया तो वही उसका एक मासूम बच्चा एक तरफ कोने में सिसक रहा था।

आखिर किसने की इतनी बेरहमी से हत्या

आपको बता दें कि दोहरे कांड की सूचना मिलते ही पुलिस मौके वारदात में पहुंची तथा शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया पुलिस ने जांच पड़ताल करने के बाद बताया कि हत्या के आरोपी युवक के आबाद की पत्नी जुबेदा के साथ प्रेम संबंध में था इतना ही नहीं जुबेदा उसे अपना मुंह बोला भाई बताते थे घटना की शाम वह जुबेदा के घर में ही था देर रात ही उसने पति और पत्नी की चाकू से हमला कर हत्या कर डाली वारदात को अंजाम देकर वह फरार हो गया है पुलिस तलाश में जुट गई है और जल्द ही गिरफ्तार करने का आश्वाशन दिया है।

अनाथ हो गया मासूम

आपको बता दें कि जिस समय आरोपी ने पत्नी और पति की हत्या की उस समय उसका बच्चा भी वहीं था लेकिन वह किसी तरह बच निकला इस घटना की जानकारी मिलते ही एसएसपी प्रभाकर चौधरी एसपी सिटी वाइज पीसीयू ब्रह्मपुरी व पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे पुलिस ने बताया कि मासूम बच्चा सुरक्षित है और अपराधी समीर कंकर खेड़ा का रहने वाला है को पकड़ने के लिए टीम को लगा दिया गया है।

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आनंद गिरि, महंत नरेंद्र गिरि की हत्या पर हरिद्वार से गिरफ्तार….?

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आनंद गिरि महंत नरेंद्र गिरि की हत्या पर हरिद्वार से गिरफ्तार

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं श्री मठ बाघम्बरी के महंत नरेंद्र गिरी का असमय मृत्यु एक तरफ तो संतो को शोक संलिप्त करने वाली है तो दूसरी तरफ यह शासन प्रशासन के लिए एक पहेली है कि एक वैश्विक हस्ती इतना कमजोर कैसे हो सकती है कि उसे फांसी पर झूलना पड़ जाए?
और यही वजह है कि कोई भी व्यक्ति या नरेंद्र गिरी को जानने वाला उनका करीबी यह मानने को तैयार ही नहीं है कि, नरेंद्र गिरी ने आत्महत्या की है सभी इसे अलग-अलग नजर से देखते हुए हत्या ही बता रहे हैं, भले में खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं।

आनंद गिरि ने करवाई अपने गुरु की हत्या…..?

बहुत से लोग इस बात के पक्षधर है कि हो न हो नरेंद्र गिरी की हत्या उनके अपने शिष्य आनंद गिरि का हाथ है।
यद्यपि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि इसे हत्या कहा जाए या आत्महत्या, परंतु लोगों का नजरिया इसे हत्या ही मानता है और इसका दोषा रोपण सीधे-सीधे नरेंद्र गिरी के शिष्य आनंद गिरि पर किया जा रहा है।
लोगों का मानना है कि नरेंद्र गिरी और आनंद गिरी के बीच पिछले लंबे समय से काफी गहरी तकरार थी और वही तकरार इस प्रकरण की वजह बनी परंतु यह सब लोगों की अपनी अपनी धारणाएं हैं। प्रशासन ने कोई भी पुष्टि करने के लिए समय मांगा है और जांच प्रक्रिया जा रही है।
ऐसे में सवाल उठना लाज़मी है कि क्या वास्तव में आनंद गिरी ऐसा कर सकते हैं।

क्या था विवाद…….?

कुछ समय पूर्व आनंद गिरी उस समय चर्चित हुए थे जब इन्हें श्री मठ बाघम्बरी से निष्कासित कर दिया गया था।
ज्ञात हो कि इन पर मठ की संपत्ति का अपने परिवारजनों के हित में प्रयोग करने का आरोप था।
मठ से निष्कासित होने के बाद आनंद गिरि ने नरेंद्र गिरी पर भी संपत्ति दुरुपयोग और कई संतों की हत्या का आरोप लगाया था उसके बाद एक दिन अचानक से यह विवाद शांत हो गया जब आनंद गिरि ने नरेंद्र गिरी के पैर छूकर उनसे माफी मांगी।
परंतु माना जा रहा है कि यह सब सिर्फ एक दिखावा था।

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