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Bishnoi Samaj ki History (इतिहास हिन्दी)

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Bishnoi Samaj की History

आज हम Bishnoi Samaj ki History (बिश्नोई समाज के इतिहास) के बारे में जानने वाले हैं हम आपको बता दें कि बिश्नोई समाज का इतिहास बहुत ही गौरव पूर्ण और प्रकृति प्रेमी रहा है और अब भी यह बहुत ही प्रकृति प्रेमी है।

बिश्नोई समाज के लोग मुख्यता पंजाब राजस्थान हरियाणा और उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में मिलते हैं बिश्नोई समाज के लोग बहुत ही मिलनसार और दयालु प्रवृत्ति के होते हैं।

ऐसा कहा जाता है कि बिश्नोई समाज की स्थापना गुरु जंभेश्वर भगवान ने की थी गुरु जंभेश्वर को जांभोजी के नाम से भी जाना जाता है।

Bishnoi Samaj के नियम

यदि हम Bishnoi Samaj की उत्पत्ति के बारे में बात करें तो यह शब्द 20 और 9 से मिलकर बना हुआ है जिसका अर्थ है 29 इसमें 29 शब्द का अर्थ है कि बिश्नोई समाज को 29 नियम दिए गए थे जिनका पालन करना जरूरी होता है।

Bishnoi Samaj में बहुत सारे नियम बहुत ही अच्छे और प्रकृति को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं और कुछ नियम ऐसे हैं जो कई 100 साल आगे की सोच रखते हैं।

Bishnoi Samaj में एक नियम है कि जब किसी बच्चे का जन्म होता है तो 1 महीने बाद उसे शब्दवाणी के 120 शब्दों का पाल दिलाकर बिश्नोई बनाया जाता है और उसे 29 नियमों का पालन करना होता है 120 शब्दों का पाहल दिला कर उसे विश्नोई बनाने के बाद ही विश्नोई समझा जाता है इस प्रकार के सभी नियमों का पालन बिश्नोई समाज के लोग करते हैं।

प्रकृति प्रेमी Bishnoi Samaj

बिश्नोई समाज की प्रकृति के Releted जो भी नियम है वह यह है।

  • जीवो की हत्या नहीं करनी।
  • हरे वृक्षों को नहीं काटना।
  • किसी को हरे वृक्षों को काटने भी नहीं देना।
  • जीवो पर दया करने और जीव पालने।
  • किसी भी प्रकार का नशा नहीं करना।
  • कोई ऐसा कार्य नहीं करना जिससे प्रकृति को नुकसान हो।

Bishnoi Samaj ki History

जांभोजी समय राजपूत परिवार से थे और वह एक शाकाहारी व्यक्ति थे वह किसी भी प्रकार का मांस मदिरा का सेवन नहीं करते थे और उन्होंने बाद में Bishnoi Samaj के लिए भी यह नियम बनाया कि कोई भी मांस मदिरा का सेवन नहीं करेगा तथा बिश्नोई समाज के लोग जम्मू जी को अपना गुरु मानते हैं और उनके बनाए गए नियमों पर चलते हैं अगर बिश्नोई समाज में किसी की मृत्यु हो जाती है तो उसे जलाया नहीं जाता उसे दफनाया जाता है ताकि उसे दफनाने में उसके शरीर को मर्दा ग्रहण कर ले और किसी भी प्रकार का प्रदूषण ना हो अगर उस शरीर को जलाएं तो वायु प्रदूषण तथा पेड़ों को भी काटा जाएगा ताकि लकड़ी प्राप्त की जा सके इसी चीज से बचने के लिए उसे दफनाया जाता है।

Bishnoi Samaj के ज्यादा लोग राजस्थान में निवास करते हैं राजस्थान की बहुतायत आबादी बिश्नोई समाज से जुड़ी है और बिश्नोई समाज में हिंदू और मुसलमान दोनों ही स्वीकार कर लिए जाते हैं।

जब वह 120 शब्दों के हवन के साथ बाहर ले और बिश्नोई समाज को स्वीकार करें तो उन्हें बिश्नोई मान लिया जाता है फिर उन्हें Bishnoi Samaj द्वारा बनाए गए 29 नियमों का पालन करना होता है उससे वह बिश्नोई बन जाते हैं।

Bishnoi Samaj के 29 नियम जांभोजी ने ही बनाई थी जो उन्होंने सभी बिश्नोई लोगों को पालन करने के लिए दिए और वह खुद भी सर्वे इन 29 नियमों का पालन करते थे और उन्होंने पूरी जिंदगी एक साधू की तरह जी।

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