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Rajasthan

राजस्थान के सभी जिलों में 21 नवंबर से फिर लागू होगी धारा-144

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Rajasthan में धारा 144 लागू

जयपुर.
राजस्थान में कोरोना संक्रमण के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच गहलोत सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए राज्य के सभी जिला मजिस्ट्रेट को 21 नवंबर से धारा-144 लगाने की पॉवर प्रदान कर दी है. गृह विभाग के ग्रुप-9 ने सभी जिला मजिस्ट्रेट को परामर्श जारी कर दिया है. जिला मजिस्ट्रेट की पावर 18 नवंबर को धारा-144 समाप्त होने के साथ ही समाप्त हो गई थी. जिला मजिस्ट्रेट लंबे समय के लिए राज्य सरकार के परामर्श से ही धारा-144 लगा सकता है.

4 लोगों से ज्यादा के एकत्र होने पर रहेगा प्रतिबंध

धारा-144 लागू होने के बाद एक जगह पर 4 लोगों से ज्यादा के एकत्र होने पर प्रतिबंध लग जायेगा. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोरोना के तेजी से फैल रहे संक्रमण के मद्देनजर लोगों से बड़ी संख्या में एक जगह एकत्र नहीं होने की अपील की है. राज्य सरकार ने यह फैसला जनहित में किया है. गहलोत ने सभी से अपील है कि इसका पालन करें. सरकार बल प्रदर्शन की बजाय चाहती है कि इसका पालन करने में पब्लिक आगे बढ़कर सहयोग करे.

धारा-144 में इन बातों पर लग जाता है प्रतिबंध

किसी जिले में धारा-144 को लागू करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट द्वारा एक नोटिफिकेशन जारी किया जाता है. उसके बाद उस इलाके में यह धारा प्रभावी हो जाती है. किसी इलाके धारा-144 लागू होती है वहां 4 या उससे ज्यादा लोग इकट्ठे नहीं हो सकते. उस क्षेत्र में पुलिस और सुरक्षा बलों को छोड़कर किसी के भी हथियार लाने और ले जाने पर रोक लग जाती है. लोगों का घर से बाहर घूमना प्रतिबंध हो जाता है. कोई भी यातायात धारा- 144 लगे रहने तक रोक दिया जाता है.

कोरोना पॉजिटिव केस आने की तादाद भी बेहताशा बढ़ गई है

उल्लेखनीय है दीवाली के दौरान बाजारों में जबर्दस्त भीड़ उमड़ी थी. उसके बाद कोरोना पॉजिटिव केस आने की तादाद भी बेहताशा बढ़ गई है. गत दो-तीन दिन से प्रदेशभर में औसतन दो से ढाई हजार से बीच कोरोना पॉजिटिव संक्रमित सामने आ रहे हैं. इसको देखते हुये राज्य सरकार ने जिला कलक्टर्स को यह परामर्श जारी किया है.

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Jankari

Bishnoi Samaj ki History (इतिहास हिन्दी)

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Bishnoi Samaj की History

आज हम Bishnoi Samaj ki History (बिश्नोई समाज के इतिहास) के बारे में जानने वाले हैं हम आपको बता दें कि बिश्नोई समाज का इतिहास बहुत ही गौरव पूर्ण और प्रकृति प्रेमी रहा है और अब भी यह बहुत ही प्रकृति प्रेमी है।

बिश्नोई समाज के लोग मुख्यता पंजाब राजस्थान हरियाणा और उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में मिलते हैं बिश्नोई समाज के लोग बहुत ही मिलनसार और दयालु प्रवृत्ति के होते हैं।

ऐसा कहा जाता है कि बिश्नोई समाज की स्थापना गुरु जंभेश्वर भगवान ने की थी गुरु जंभेश्वर को जांभोजी के नाम से भी जाना जाता है।

Bishnoi Samaj के नियम

यदि हम Bishnoi Samaj की उत्पत्ति के बारे में बात करें तो यह शब्द 20 और 9 से मिलकर बना हुआ है जिसका अर्थ है 29 इसमें 29 शब्द का अर्थ है कि बिश्नोई समाज को 29 नियम दिए गए थे जिनका पालन करना जरूरी होता है।

Bishnoi Samaj में बहुत सारे नियम बहुत ही अच्छे और प्रकृति को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं और कुछ नियम ऐसे हैं जो कई 100 साल आगे की सोच रखते हैं।

Bishnoi Samaj में एक नियम है कि जब किसी बच्चे का जन्म होता है तो 1 महीने बाद उसे शब्दवाणी के 120 शब्दों का पाल दिलाकर बिश्नोई बनाया जाता है और उसे 29 नियमों का पालन करना होता है 120 शब्दों का पाहल दिला कर उसे विश्नोई बनाने के बाद ही विश्नोई समझा जाता है इस प्रकार के सभी नियमों का पालन बिश्नोई समाज के लोग करते हैं।

प्रकृति प्रेमी Bishnoi Samaj

बिश्नोई समाज की प्रकृति के Releted जो भी नियम है वह यह है।

  • जीवो की हत्या नहीं करनी।
  • हरे वृक्षों को नहीं काटना।
  • किसी को हरे वृक्षों को काटने भी नहीं देना।
  • जीवो पर दया करने और जीव पालने।
  • किसी भी प्रकार का नशा नहीं करना।
  • कोई ऐसा कार्य नहीं करना जिससे प्रकृति को नुकसान हो।

Bishnoi Samaj ki History

जांभोजी समय राजपूत परिवार से थे और वह एक शाकाहारी व्यक्ति थे वह किसी भी प्रकार का मांस मदिरा का सेवन नहीं करते थे और उन्होंने बाद में Bishnoi Samaj के लिए भी यह नियम बनाया कि कोई भी मांस मदिरा का सेवन नहीं करेगा तथा बिश्नोई समाज के लोग जम्मू जी को अपना गुरु मानते हैं और उनके बनाए गए नियमों पर चलते हैं अगर बिश्नोई समाज में किसी की मृत्यु हो जाती है तो उसे जलाया नहीं जाता उसे दफनाया जाता है ताकि उसे दफनाने में उसके शरीर को मर्दा ग्रहण कर ले और किसी भी प्रकार का प्रदूषण ना हो अगर उस शरीर को जलाएं तो वायु प्रदूषण तथा पेड़ों को भी काटा जाएगा ताकि लकड़ी प्राप्त की जा सके इसी चीज से बचने के लिए उसे दफनाया जाता है।

Bishnoi Samaj के ज्यादा लोग राजस्थान में निवास करते हैं राजस्थान की बहुतायत आबादी बिश्नोई समाज से जुड़ी है और बिश्नोई समाज में हिंदू और मुसलमान दोनों ही स्वीकार कर लिए जाते हैं।

जब वह 120 शब्दों के हवन के साथ बाहर ले और बिश्नोई समाज को स्वीकार करें तो उन्हें बिश्नोई मान लिया जाता है फिर उन्हें Bishnoi Samaj द्वारा बनाए गए 29 नियमों का पालन करना होता है उससे वह बिश्नोई बन जाते हैं।

Bishnoi Samaj के 29 नियम जांभोजी ने ही बनाई थी जो उन्होंने सभी बिश्नोई लोगों को पालन करने के लिए दिए और वह खुद भी सर्वे इन 29 नियमों का पालन करते थे और उन्होंने पूरी जिंदगी एक साधू की तरह जी।

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राजस्थान के नगरों के उपनाम एव उनकी उपाधियाँ

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राजस्थान के नगरों के उपनाम एव उनकी उपाधियाँ जो हर प्रकार के परीक्षा पात्र में पूछी जाती है। अगर आप राजस्थान में रहते है तो आपको ये सब पता होनी चाहिए।

राजस्थान के बारे में बहुत सरे उपनाम जो मेने आपको यहाँ दिए है। अगर आप राजस्थान में रहकर किसी भी प्रकार की सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे है तो आपको इसके बारे में पता होना चाहिए ये आपके शिक्षा के स्तर को बहुत ही ज्यादा बढ़ती है, और आपको अपनी राजस्थानी संस्कृति के बारे में जानने का मौका देती है।

【आपणो राजस्थान】

🔰 उपनाम :- (राजस्थान के विशेष संदर्भ में) :- अति विशेष ➖👌

  • अभ्रक की मंडी – भीलवाड़ा
  • आदिवासियों का शहर – बांसवाड़ा
  • अन्न का कटोरा – श्री गंगानगर
  • औजारों का शहर – नागौर
  • आइसलैंड आॅफ ग्लोरी/रंग श्री द्वीप – जयपुर
  • उद्यानों/बगीचों का शहर – कोटा
  • ऊन का घर – बीकानेर
  • ख्वाजा की नगरी – अजमेर
  • गलियों का शहर – जैसलमेर
  • गुलाबी नगरी – जयपुर
  • घंटियों का शहर – झालरापाटन
  • छोटी काशी/दूसरी काशी – बूंदी
  • जलमहलों की नगरी – डीग
  • झीलों की नगरी – उदयपुर
  • वस्त्र नगरी – भीलवाड़ा
  • देवताओं की उपनगरी – पुष्कर
  • नवाबों का शहर – टोंक
  • पूर्व का पेरिस/भारत का पेरिस – जयपुर
  • पूर्व का वेनिस – उदयपुर
  • पहाड़ों की नगरी – डूंगरपुर
  • भक्ति/शक्ति व साधना की नगरी – मेड़ता सिटी
  • मूर्तियों का खजाना – तिमनगढ, करौली
  • मरूस्थल की शोभा/मरू शोभा – रोहिड़ा
  • राजस्थान की मरू नगरी – बीकानेर
  • राजस्थान का हदृय/दिल – अजमेर
  • राजस्थान का गौरव – चितौड़गढ
  • राजस्थान का सिंह द्वार – अलवर
  • राजस्थान का अन्न भंडार – गंगानगर
  • राजस्थान की स्वर्ण नगरी (गोल्ड सिटी) – जैसलमेर
  • राजस्थान की शैक्षिक राजधानी – अजमेर
  • राजस्थान का कश्मीर – उदयपुर
  • राजस्थान का काउंटर मैगनेट – अलवर
  • राजस्थान की मरूगंगा – इंदिरा गांधी नहर
  • पश्चिम राजस्थान की गंगा – लूनी नदी
  • राजस्थान की मोनालिसा – बणी-ठणी
  • रेगिस्तान का सागवान – रोहिड़ा
  • राजस्थान का खजुराहो – किराडू
  • राजस्थान का मिनी खजुराहो – भंडदेवरा
  • हाड़ौती का खजुराहो – भंडदेवरा
  • मेवाड़ का खजुराहो – जगत
  • राजस्थान का कानपुर – कोटा
  • राजस्थान का नागपुर – झालावाड़
  • राजस्थान का राजकोट – लूणकरणसर
  • राजस्थान का स्काॅटलेंड – अलवर
  • राजस्थान का नंदनकानन – सिलीसेढ झील, अलवर
  • राजस्थान की धातुनगरी – नागौर
  • राजस्थान का आधुनिक विकास तीर्थ – सूरतगढ
  • राजस्थान का पंजाब – सांचैर
  • राजस्थान की अणु नगरी – रावतभाटा
  • राजस्थान का हरिद्वार – मातृकंुडिया, चितौड़गढ
  • राजस्थान का अंडमान – जैसलमेर
  • रेगिस्तान/मरूस्थल का गुलाब – जैसलमेर
  • राजपूताना की कूंजी – अजमेर
  • राजस्थान का नाका/मुहाना – अजमेर
  • राजस्थान का मैनचेस्टर – भीलवाड़ा
  • राजस्थान का नवीन मैनचेस्टर – भिवाड़ी
  • राजस्थान का जिब्राल्टर – तारागढ, अजमेर
  • राजस्थान का ताजमहल – जसवंतथड़ा, जोधपुर
  • राजस्थान का भुवनेश्वर – ओसियां
  • राजस्थान की साल्ट सिटी – सांभर
  • राजस्थान की न्यायिक राजधानी – जोधपुर
  • राजस्थान का चेरापूंजी – झालावाड़
  • राजस्थान का ऐलोरा – केालवी, झालावाड़
  • राजस्थान का जलियावाला बाग – मानगढ, बांसवाड़ा
  • राजस्थान का शिमला – मा. आबू
  • राजस्थान का पूर्वीद्वार – धौलपुर
  • रत्न नगरी – जयपुर
  • वराह नगरी – बारां
  • वर्तमान नालंदा – कोटा
  • लव-कुश की नगरी – सीताबाड़ी, बारां
  • शिक्षा का तीर्थ स्थल/शैक्षिक नगरी – कोटा
  • समस्त तीर्थस्थलों का भांजा – मचकुंड, धौलपुर
  • सूर्य नगरी (सन सिटी आॅफ राजस्थान) – जोधपुर
  • सुनहरा त्रिकोण – दिल्ली-आगरा-जयपुर
  • मरू त्रिकोण – जोधपुर-जैसलमेर-बीकानेर
  • सौ द्विपों का शहर – बांसवाड़ा
  • हेरिटेज सिटी – झालरापाटन
  • हरिण्यकश्यप की राजधानी – हिंडौनसिटी
  • हवेलियों का शहर – जैसलमेर
  • पीले पत्थरों का शहर – जैसलमेर
  • सैलानी नगरी – जैसलमेर
  • भारत का मक्का – अजमेर
  • प्राचीन राजस्थान का टाटानगर – रेढ , टोंक
  • स्वतंत्रता प्रेमियों का तीर्थ स्थल – हल्दीघाटी
  • भारतीय मूर्तिकला का विश्वकोष – विजय स्तंभ
  • म्यजियम सिटी – जैसलमेर
  • मरूस्थल का प्रवेश द्वार – जोधपुर
  • बावड़ियों का शहर (सिटी आॅफ स्टेप वेल्स)- बूंदी
  • पूर्वी राजस्थान का कश्मीर – अलवर
  • पत्थरों का शहर – जोधपुर
  • ब्ल्यू सिटी (नीली नगरी) – जोधपुर
  • मारवाड़ का लघु मा. आबू – पीपलूद, बाड़मेर
  • भारतीय बाघों का घर – रणथंभौर
  • ग्रेनाइट सिटी – जालौर
  • मारवाड़ का सागवान – रोहिड़ा
  • पहाड़ों की रानी – डूंगरपुर
  • पानी,पत्थर व पहाड़ों की पुरी – उदयपुर
  • भक्ति व शक्ति की नगरी – चितौड़गढ
  • महाराजा रंतिदेव की नगरी – केशोरायपाटन
  • काॅटन सिटी – सूरतगढ
  • राजस्थान की संतरा नगरी – झालावाड़
  • राजस्थान की वस्त्र नगरी – भीलवाड़ा
  • रेड डायमंड (लाल हीरा) – धौलपुर
  • मारवाड़ का अमृत सरोवर – जवाई बांध
  • फाउंटेन व मांउटेन का शहर – उदयपुर
  • मेवाड़ का हरिद्वार – मातृकुंडिया
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