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पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद

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कल पश्चिम बंगाल चुनाव का रिजल्ट आया और हमेशा सब दिखाकर ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में चुनाव जीत लिया है ममता बनर्जी ने बहुत ही एकतरफा जीत हासिल की है अब इस चुनाव को हारने के कारण हर प्रकार से बीजेपी पर धावा बोला जा रहा है।

हर प्रकार से चाहे वह करो ना के कारण हो या पश्चिम बंगाल के अंदर रैलियां करवाने के कारण या किसी और कारण से भी बीजेपी को टारगेट किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने इतना जोर लगाने पर भी पश्चिम बंगाल को हार लिया।

पश्चिम बंगाल में इन चुनावों की स्थिति को देखते हुए ऐसा प्रतीत हो रहा है।

अब अब बीजेपी पश्चिम बंगाल से हारने के बाद पूरे देश में हर तरफ से टारगेट की जा रही है चाहे वह कोरोना के लिए हो ऑक्सीजन की कमी के लिए हो वैक्सीन की कमी के लिए हो या किन्ही अन्य कारणों से हर तरफ बीजेपी को टारगेट बनाया जा रहा है और बीजेपी की स्थिति बहुत ही दयनीय सी हो गई है।

बंगाल चुनाव में ममता दीदी के जीतने के बाद अब पूरी बीजेपी पार्टी के सभी लोगों में थोड़ा गम का माहौल है और कुछ लोग डर के माहौल में भी हैं।

पश्चिम बंगाल में हारने के बाद अब बीजेपी पर बहुत सारे प्रहार हो रहे हैं और बहुत सारे प्रहार होने बाकी हैं अब हर प्रकार से बीजेपी को गहरा जा रहा है।

इसके साथ-साथ कुछ राजनीतिक पार्टियां जोकि पश्चिम बंगाल में खुद खाता भी नहीं खोल पाई लेकिन बीजेपी के हारने से खुश नजर आ रही है चारों और दिख रहा है की बीजेपी की हार का वह सभी राजनीतिक पार्टियां अपनी हार से ज्यादा मजा ले रही हैं।

अगर हम थोड़ा ध्यान लगा कर सोचे तो यह हमें अबकी बार अमेरिका के चुनाव की तरह ही प्रतीत होता दिख रहा है अगर हम अमेरिका के चुनाव और पश्चिम बंगाल चुनाव में कुछ समानताएं ढूंढने की कोशिश करें तो दोनों में ही सबसे बड़ी समानता यह है कि दोनों में हार का कारण कोरोना काल में सही तरह से प्रबंधन ना कर पाना ही लग रहा है।

शुरू से ही पश्चिम बंगाल के बाहर के लोगों द्वारा यह हवा बनाई जा रही थी कि अबकी बार बीजेपी पश्चिम बंगाल में जीतेगी लेकिन पश्चिम बंगाल के लोगों ने ही यह साबित कर दिया कि उन्हें तृणमूल कांग्रेस ही चाहिए या यूं कहें दीदी ही चाहिए अब आगे यह देखना है कि जिस जनता ने ममता बनर्जी को चुना है वह ममता बनर्जी जनता की उम्मीदों पर खरी उतर पाती है या नहीं।

आज मैंने बहुत से लोगों के चेहरे पर ममता बनर्जी की जीत के कुछ अलग ही भाव देखें वह ममता बनर्जी की जीत से ज्यादा बीजेपी की हार से खुश थे।

जब आज हमने कुछ किसान आंदोलन समर्थकों से बात की तो हमें उनके विचार जानने का मौका मिला वह बीजेपी को किसी भी हालत में हारता हुआ देखना चाहते थे और आज उनके कुछ मनोकामना पूरी हुई और पश्चिम बंगाल में जब बीजेपी की हार हुई तो बहुत सारे किसान आंदोलन समर्थकों ने जश्न मनाया और एक तरह से उन्हेंभी ममता बनर्जी की जीत से ज्यादा बीजेपी की हार की खुशी थी।

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Crime

डॉक्टर की लापरवाही,चली गई नवजात की जान……

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डॉक्टर की लापरवाही,चली गई नवजात की जान

डॉक्टर को पृथ्वी पर भगवान का रूप माना जाता है क्योंकि एक डॉक्टर ही है जो विकारों को समझ कर उनसे मुक्ति दिलाता है परंतु कभी-कभी छोटी-छोटी लापरवाहियां बड़ी वारदात की वजह बन जाती है और पूरी डॉक्टर टीम कटघरे में खड़ी हो जाती है।
ऐसी ही कुछ खबर उत्तर प्रदेश के संभलपुरु से है जहां पर डॉक्टर की लापरवाही के चलते एक नवजात शिशु की जान चली गई।

भाग गया स्टॉफ ……… मौके पर पहुंची पुलिस….

उत्तर प्रदेश के संबलपुर जिले में बहजोई क्षेत्र से आ रही खबर के अनुसार वहां पर एक नवजात शिशु की मौत हो जाने से हंगामा हो गया।
आपको बता दें कि चितनपुर निवासी नवाब अली को उनकी पत्नी यासमीन से एक पुत्र का जन्म हुआ, जिसे कुछ समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था परंतु इलाज के दौरान उस शिशु की मृत्यु हो गई जिससे अस्पताल परिसर में हंगामा हो गया और अस्पताल का स्टाफ अस्पताल छोड़कर भाग गया।
बताया जा रहा है कि मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों को शांत कराया है इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने नर्सिंग होम को सील कर दिया है।

प्रति मिनट होती है एक नवजात की मौत……

आंकड़े के मुताबिक भारत में प्रतिवर्ष लगभग 5 मिलियन नवजात शिशु घर पर जन्म लेते हैं घर में सुविधाएं न होने से प्रायः कभी मां तो कभी बच्चे की मौत हो जाती थी परंतु स्वास्थ्य सुविधाओं में लगातार सुधार की वजह से यह आंकड़ा अब कम हुआ है फिर भी अभी प्रति मिनट एक नवजात शिशु की मृत्यु हो जा रही है।

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Crime

दोहरे हत्याकांड से दहल उठा ब्रह्मपुरी, आखिर किसने की इतनी बेरहमी से हत्या

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दोहरे हत्याकांड से दहल उठा ब्रह्मपुरी

हर एक दिन कोई ना कोई खबर रिश्तो के कत्ल से संबंधित होती है जो व्यक्ति के मानसिक कुरूपता को दर्शाता है कुछ ऐसी ही घटना मेरठ से निकल कर सामने आ रही है जहां के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के सिटी कॉलोनी देर रात दो हत्याओं से दहल उठी इसकी सूचना जब आसपास के लोगों को लगी तो हड़कंप मच गया दृश्य में कॉलोनी निवासी आभास हुआ उसकी पत्नी जुबेदा का शव खून से लथपथ जमीन पर पड़ा हुआ पाया गया तो वही उसका एक मासूम बच्चा एक तरफ कोने में सिसक रहा था।

आखिर किसने की इतनी बेरहमी से हत्या

आपको बता दें कि दोहरे कांड की सूचना मिलते ही पुलिस मौके वारदात में पहुंची तथा शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया पुलिस ने जांच पड़ताल करने के बाद बताया कि हत्या के आरोपी युवक के आबाद की पत्नी जुबेदा के साथ प्रेम संबंध में था इतना ही नहीं जुबेदा उसे अपना मुंह बोला भाई बताते थे घटना की शाम वह जुबेदा के घर में ही था देर रात ही उसने पति और पत्नी की चाकू से हमला कर हत्या कर डाली वारदात को अंजाम देकर वह फरार हो गया है पुलिस तलाश में जुट गई है और जल्द ही गिरफ्तार करने का आश्वाशन दिया है।

अनाथ हो गया मासूम

आपको बता दें कि जिस समय आरोपी ने पत्नी और पति की हत्या की उस समय उसका बच्चा भी वहीं था लेकिन वह किसी तरह बच निकला इस घटना की जानकारी मिलते ही एसएसपी प्रभाकर चौधरी एसपी सिटी वाइज पीसीयू ब्रह्मपुरी व पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे पुलिस ने बताया कि मासूम बच्चा सुरक्षित है और अपराधी समीर कंकर खेड़ा का रहने वाला है को पकड़ने के लिए टीम को लगा दिया गया है।

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आनंद गिरि, महंत नरेंद्र गिरि की हत्या पर हरिद्वार से गिरफ्तार….?

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आनंद गिरि महंत नरेंद्र गिरि की हत्या पर हरिद्वार से गिरफ्तार

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं श्री मठ बाघम्बरी के महंत नरेंद्र गिरी का असमय मृत्यु एक तरफ तो संतो को शोक संलिप्त करने वाली है तो दूसरी तरफ यह शासन प्रशासन के लिए एक पहेली है कि एक वैश्विक हस्ती इतना कमजोर कैसे हो सकती है कि उसे फांसी पर झूलना पड़ जाए?
और यही वजह है कि कोई भी व्यक्ति या नरेंद्र गिरी को जानने वाला उनका करीबी यह मानने को तैयार ही नहीं है कि, नरेंद्र गिरी ने आत्महत्या की है सभी इसे अलग-अलग नजर से देखते हुए हत्या ही बता रहे हैं, भले में खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं।

आनंद गिरि ने करवाई अपने गुरु की हत्या…..?

बहुत से लोग इस बात के पक्षधर है कि हो न हो नरेंद्र गिरी की हत्या उनके अपने शिष्य आनंद गिरि का हाथ है।
यद्यपि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि इसे हत्या कहा जाए या आत्महत्या, परंतु लोगों का नजरिया इसे हत्या ही मानता है और इसका दोषा रोपण सीधे-सीधे नरेंद्र गिरी के शिष्य आनंद गिरि पर किया जा रहा है।
लोगों का मानना है कि नरेंद्र गिरी और आनंद गिरी के बीच पिछले लंबे समय से काफी गहरी तकरार थी और वही तकरार इस प्रकरण की वजह बनी परंतु यह सब लोगों की अपनी अपनी धारणाएं हैं। प्रशासन ने कोई भी पुष्टि करने के लिए समय मांगा है और जांच प्रक्रिया जा रही है।
ऐसे में सवाल उठना लाज़मी है कि क्या वास्तव में आनंद गिरी ऐसा कर सकते हैं।

क्या था विवाद…….?

कुछ समय पूर्व आनंद गिरी उस समय चर्चित हुए थे जब इन्हें श्री मठ बाघम्बरी से निष्कासित कर दिया गया था।
ज्ञात हो कि इन पर मठ की संपत्ति का अपने परिवारजनों के हित में प्रयोग करने का आरोप था।
मठ से निष्कासित होने के बाद आनंद गिरि ने नरेंद्र गिरी पर भी संपत्ति दुरुपयोग और कई संतों की हत्या का आरोप लगाया था उसके बाद एक दिन अचानक से यह विवाद शांत हो गया जब आनंद गिरि ने नरेंद्र गिरी के पैर छूकर उनसे माफी मांगी।
परंतु माना जा रहा है कि यह सब सिर्फ एक दिखावा था।

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